

जिस दिन तड़के जाना था उसके एक दिन पहले शाम बस टर्मिनल से फोन आया कि आपका वीजा तो समाप्त है और आप तो कल पाकिस्तान जा ही नहीं सकते? "आप तो पाकिस्तान जा ही नहीं सकते" यह जुमला इतनी जगह और इतनी बार सुना था कि मूड झल्ला गया. मैंने कहा वीजा जारी हुआ और जारी होने के साथ एक्सपायर्ड भी हो गया? मैंने तुरंत पाकिस्तान के दूतावास में संबंधित अधिकारी को फोन किया कि यह कैसा वीजा दिया आपने? मैं आपको उसी वक्त कह रहा था कि इसमें टेक्नीकल ऐरर है. अधिकारी ने गलती स्वीकार करते हुए मुझसे कहा कि मैं तुरंत पासपोर्ट लेकर आ जाऊं. मुझे चूंकि अगली सुबह की वहां के लिए रवाना होना था, सो मैं तुरंत पासपोर्ट लेकर पाकिस्तानी उच्चायोग पहुंच गया. इत्तफाक से तुरंत उन लोगों ने एक महीने का अतिरिक्त वीजा दे दिया. सुबह छह बजे बस चलती है इसलिए बस चलने से दो घंटे पहले वहां जाकर रिपोर्ट करना पड़ता है। सो घर से सुबह तीन-सवा तीन बजे ही निकलना था. यह सोचकर कि कहीं मैं सोता ही न रह जाऊं, रात भर नहीं ही नहीं आई....और अधमुंदी आंखों बार-बार चचा ग़ालिब यह शेर सुनाते रहे...मौत का एक दिन मुअय्यन है, नींद क्यों रात भर नहीं आती.....(जारी....)
4 टिप्पणियां:
आगे का इन्तजार है
maja aa gaya apka sansmaran padh kar.
अंदाज रोचक है-इन्तजार कर रहे हैं अगली कड़ी का.
अगली कडी का अनुभव इतना दिलचस्प है कि क्या बताऊं....धीरे-धीरे लिख रहा हूं....आपलोगों की हौसलाअफजाई की तमन्ना रखता हूं.
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