गुरुवार, जून 05, 2008

पाकिस्तान को तो मंजूर था मगर भारत सरकार को ही मंजूर नहीं था।

वीज़ा के लिए जब मैंने पाकिस्तान उच्चायोग में फोन किया तो बिना कुछ जाने फोन अटेंड करनेवाले अधिकारी ने कहा कि घूमने के लिए आपको पाकिस्तान का वीजा नहीं मिल सकता। फिर मैंने कहा कि मेरी बात तो सुन लीजिये, लेकिन वे कुछ भी सुनने को तैयार न थे। बहरहाल, भारत में पाकिस्तान के उच्चायोग जनाब शाहिद मलिक से इस बारे में हुई अपनी बात का हवाला दिया तब काफी तफ्तीश के बाद वीजा फार्म भरने को दिया और मेरा पासपोर्ट रख लिया. बीस-पच्चीस दिन गुजर गये, मेरी बेकरारी बढ़ती ही जा रही थी और वे लोग थे कि मुझे इत्मीनान रखने के लिए कहते थे। खैर, वीजा मिल गया।

पहले मैंने सोचा था कि यहां से अमृतसर जाऊंगा और वहां से अटारी बोर्डर पार करके लाहौर चला जाऊंगा। लेकिन यह पाकिस्तान को तो मंजूर था मगर भारत सरकार को ही मंजूर नहीं था। पता चला कि अगर इस तरह जाना है तो विदेश मंत्रालय से इसके लिए लिखित अनुमति लेनी पड़ेगी। यह मुझे बहुत झंझट का काम लगा, सो इस इरादे को ही मुल्तवी कर दिया कि विदेश मंत्रालय जाऊं और वहां का चक्कर काटूं। भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए और पाकिस्तान ने भारतीय नागरिकों के लिए यह कानून बनाया है कि वीजा में आपको मोड आफ ट्रेवल भी लिखना पड़ेगा-रेल, बस या हवाई जहाज। इन तीनों में से किसी एक का चयन करने के बाद आप किसी और साधन से नहीं आ-जा सकते। मान लीजिये आपने वीजा फार्म में बस भर दिया है, तो लौटते समय आप प्लेन से चाहें तो नहीं लौट सकते। बी.बी.सी. हिंदी सेवा के मेरे दोस्त शुभ्रांशु चौधरी के साथ यही हुआ था। वे प्लेन से गये थे और चाहते थे कि पैदल सीमा पार करके अमृतसर आ जाएं। उनके इस अनुरोध को पाकिस्तान ने तो मान लिया था मगर भारत ने स्वीकार नहीं किया और उन्हें दोबारा पाकिस्तान लौटकर प्लेन से भारत वापस आना पड़ा। मुझे समझ में नहीं आता है कि प्लेन से गया हुआ आदमी यदि बस से वापस आ गया तो इसमें गजब क्या हो जाएगा? दोनों देशों की ब्यूरोक्रेसी ही शायद इस बात को बेहतर जानती होंगी। मगर आम अवाम को यह जानने की लालसा है कि आने-जाने के लिए जब वैध दस्तावेज हो तब नागरिक किसी भी मोड से जाए तो इससे किस तरह का खतरा पैदा हो सकता है? खैर, मेरी दिक्कत इसी वजह से शुरू हुई कि मैं लाहौर से वापस पैदल सीमा पार करना चाहता था, मगर इसी कानून की वजह से यह संभव नहीं हो सका।

(जारी...)

4 टिप्‍पणियां:

अखिल तिवारी ने कहा…

achcha kia jo aapne ye baat bata di. ham bhi aisa hi kuchh plan kar rahe hein agle 1-2 saal k andar. jaankaari kaam aayegi. dhanyavaad

Udan Tashtari ने कहा…

कैसे कैसे नियम बना दिये हैं..हम्म!

अजित वडनेरकर ने कहा…

अच्छी पोस्ट। क्या खूब नियम बनाए जाते हैं सरकारी मशीनरी में...
इन्हें बनाने के बाद हमारे अफ़सर अपनी अक्लमंदी पर इतराते हैं और लोग उनकी मूर्खताओं पर सिर धुनते हैं।
आपसे अनवरोध है,ये वर्ड वेरीफिकेशन हटा दीजिए।

अजित वडनेरकर ने कहा…

अच्छी पोस्ट। विचित्र नियम हैं।