बुधवार, मार्च 17, 2010

हत्या औऱ आत्महत्या से बचा स्त्री का जीवन


बनारस औऱ मथुरा में विधवा आश्रम में विधवाओं के जीवन और जीवन-चर्या से जो लोग परिचित हैं उन्हें कुछ बताने की जरूरत नहीं. पढी-लिखी और कमाऊ औरतें भी पति से पिटती हैं और उसे पति का प्यार बताती हैं. ऐसा सिर्फ अपने देश में ही नहीं होता. अमेरिकी और इंग्लिश औरतें भी खूब पिटती हैं और वह भी तब जब वे आर्थिक रूप से सबला हैं और भारत के मुकाबले उनका सशक्तिकरण भी ज्यादा हुआ है.


परसों कनाट प्लेस में राजीव चौक के मेट्रो स्टेशन के पास किसी का इंतजार कर रहा था. चौबीस-पच्चीस साल का एक लड़का औऱ बाईस-तेइस साल की बेहद खूबसूरत लड़की गलबहियां डाले खड़े-से थे. दिल्ली में और खास तौर पर कनाट प्लेस में ऐसा दृश्य लगभग आम है. इसमें कोई नई या अनोखी बात नहीं. मगर मैंने देखा दो मिनट के बाद लड़की कहीं जाने के लिए ल़ड़के से इसरार कर रही थी, जो जिद में बदलने लगी और लड़की उस लड़के का हाथ पकड़कर आटो की तरफ खींचने लगी। लड़का सख्ती से मना कर रहा था...मगर लड़की इसरार किए जा रही थी. अचानक लड़के दनादन लड़की को थप्पड़ मारना शुरू कर दिया. लड़की पिट रही थी... थोड़ा रो भी रही थी मगर पिटने का विरोध नहीं कर रही थी. पुलिस की जिप्सी आकर रुकी. पुलिस वाले ने लड़की से पूछा कि लड़का उसे पीट क्यों रहा है....इस पर लड़की खामोश रही ....मगर लड़़के ने कहा आप जाओ...ये हमारा आपस का मामला है। पुलिस की जिप्सी तत्काल वहां से रवाना हो गई. मगर उस पिटती हुई लड़की की तस्वीर मेरे जेहन में बार-बार आ ही जाती है.

पिटने का मामला और खास तौर पर औरतों के पिटने का...बड़ा पुराना है....लगभग आदिम राग है....

राज्य कोई भी हो गरीब और असहाय औरतों के लिए कोई फर्क नहीं पड़ता। राज्य अगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश हो और उसका शहर मुजफ्फरनगर हो तो पूरे देश में सबसे ज्यादा प्रेमी-प्रेमिकाओं की हत्या करने वाले जिले के सेहरा अपने सिर पर बांधता है....और राज्य अगर हरियाणा हो तो खाप पंचायतें दो बच्चों के मां-बाप बने जाने वाले व्यक्ति को भी भाई-बहन की तरह रहने का फरमान सुना देती है। तमाम मानवाधिकार आयोग, गृह मंत्रालय औऱ राज्य सरकार इन पंचायतों के सामने असहाय नजर आती है। इसी राज्य के बहादुरगढ़ जैसे कस्बाई शहर को कन्या भ्रूण हत्या करने में खास महारत हासिल है.

बिहार और झारखंड में कुलीनता की हिंसा से बचा जीवन डायन बताकर खत्म कर दिया जाता है। सरेआम गरीब औऱ विधवा औऱत को डायन बताकर विष्ठा पीने को मजबूर किया जाता है, बाल खींच-खींचकर पीटा जाता है और निर्ममता पूर्वक मार डाला जाता है. हत्या औऱ आत्महत्या से बचा स्त्री का जीवन इसी तरह मर्दो के संसार में बीतता है.

4 टिप्‍पणियां:

Mired Mirage ने कहा…

देखिए यह सदियों की कंडिशनिंग है। यह सरलता से नहीं खत्म होगी। पुरुष तो अपने को जबरन इस मानसिकता से तब रोक सकता है जब उसे कड़ी सजा का भय हो। परन्तु स्त्री जिसे युगों से यही सिखाया गया है कि सहो और सहती रहो, अपनी बेड़ियों को सरलता से नहीं उतार सकती। कुछ सीमा तक यह प्रयास तब सफल हो सकता है जब घर में माता पिता तथा स्कूल में अध्यापक उन्हें उन पर की जाने वाली हिंसा का पुरजोर विरोध करना सिखाएँगे। हर बेटी को यदि यह कहा जाए कि यदि कोई तुम पर हाथ उठाए तो उस हाथ को यदि शारीरिक बल से नहीं तोड़ सकती तो न्यायिक बल से तोड़ दो। जो हाथ तुम पर बल प्रयोग करता है उसको कभी भी मत थामो।
घुघूती बासूती

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

varnvadi soch tyage bager kalyan nahi ho sakta bhai.
do u agree ?

सुशीला पुरी ने कहा…

सोचने के लिए बहुत कुछ है .........

स्वाति ने कहा…

purush hote hue bhi nari ki is dasha par aapne bahut hi sateek dhang se likha hai . keep writing..