बुधवार, सितंबर 19, 2007

मैं सच बोलूंगी और हार जाऊंगी

मैं सच बोलूंगी और हार जाऊंगी
वो झूठ बोलेगा और लाजवाब कर देगा

परवीन शाकिर

सच है यह कि आज हर जगह सच की हार हो रही है. सच बोलने वाले सच्चे लोग झूठ से, झूठे लोगों से हार रहे हैं.फर्जी और चालबाज लोग, चतुर-सुजान निश्छलों के मुकाबले ज्यादा बेहतर स्थिति में हैं. सत्ता से उनकी सांठ-गांठ भी अच्छी रहती है. इसलिए यह अकारण नहीं है कि हिंदी के आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कुटज नामक निबंध में अपनी मनोव्यथा को सही तरीके से व्यक्त किया है. क्या लेकर आए हैं लोग और क्या लेकर जाएंगे, मैं सोचता हूं-और लोग भी क्या यही सोचते हैं?

2 टिप्‍पणियां:

अविनाश ने कहा…

तुम तो उर्दू साहित्‍य के ठीकठाक जानकार हो, शेर ग़लती कैसे लिख गये। दुरुस्‍त करो: मैं सच कहूंगी मगर फिर भी हार जाऊंगी, वो झूठ बोलेगा और लाजवाब कर देगा।

Pankaj Parashar ने कहा…

शुक्रिया.