शनिवार, मार्च 24, 2007

औरतों की पत्थर मार मार कर हत्या करने की प्रथा


ईरान के कड़े इस्लामी क़ानूनों के तहत व्यभिचार के आरोप में औरतों की पत्थर मार मार कर हत्या करने की प्रथा रही है.लेकिन इस्लामी क्रांति के 22 साल बाद वहाँ उदारवाद की हवा चलने लगी है और ईरानी जनता का एक हिस्सा कट्टरवादी इस्लाम से मुँह मोड़ने लगा है.ख़ास तौर पर विश्वविद्यालय के छात्रों ने तो सड़कों पर उतर कर हिंसक विरोध प्रदर्शनों के ज़रिए कट्टरवादी मौलवियों के कुछ फ़ैसलों के ख़िलाफ़ अपना ग़ुस्सा ज़ाहिर किया है.सुधारवादी सांसद जमीला कादीवर के हवाले से भी कहा गया है कि औरतों को संगसार करने की प्रथा ख़त्म होने वाली है.हालाँकि इस्लामी क़ानून संगसारी की इजाज़त देता है, लेकिन ईरान में इस तरह की सज़ा दिए जाने की घटनाएँ लगातार कम होती जा रही हैं.पिछले साल की पहली छमाही में दो महिलाओं को यह सज़ा सुनाई गई और उसके बाद से अब तक किसी को भी यह सख़्त सज़ा नहीं दी गई है.विरोधईरान में उदारवादियों और महिला संगठनों की ओर से इस क़ानून का लगातार विरोध किया जाता रहा है.यही नहीं पश्चिमी देशों, ख़ास तौर पर यूरोपीय संघ ने भी इन क़ानूनों का कड़ा विरोध किया है.ईरान के सुधारवादी विदेशों में अपने देश की छवि को लेकर ख़ासे चिंतित हैं.ईरानी संसद की महिला सदस्य इस मामले में लंबे अर्से से आंदोलन चलाती आ रही हैं.उनका कहना है कि इसे क़ानून की किताबों से हटा दिया जाना चाहिए क्योंकि क़ुरआन में इस बारे में साफ़ साफ़ कुछ नहीं कहा गया है.इस अभियान से जुड़ी एक महिला सांसद जमीला कादीवर ने तेहरान के एक अख़बार को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि न्यायपालिका के अध्यक्ष ने एक सर्कुलर जारी करके संगसारी की सज़ा न देने की हिदायत दी है.पिछले साल दो महिलाओं को संगसारी की सज़ा दिए जाने से ऐसा लगा था कि दक्षिणपंथी तत्त्व प्रशासन पर हावी हो गए हैं और वे उदारवादियों को दबाने के लिए ऐसे क़दम उठा रहे हैं.

1 टिप्पणी:

Aflatoon ने कहा…

udaarvadi taakaton ko bal miley.anya dharmon ke kattarpanthiyon se muqabala karane ki taakat badhegi.