शुक्रवार, मार्च 02, 2007

इराक़ की बेशक़ीमती निशानियां कहाँ पहुँची?


लूटपाट में सभ्यताओं की बेशक़ीमती निशानियां ग़ायब हो गईं
इराक़ पर अमरीकी और ब्रितानी सेनाओं के हमले के दौरान मची लूटपाट में इराक़ की सभ्यता की निशानियों को सहेजने वाले स्थानों को भी नहीं बख़्शा गया और लूटपाट के साथ साथ कुछ 'समझदार' लोगों ने भी बहती गंगा में हाथ धोना सही समझ लिया.लेकिन अब उन्हें इराक़ की सभ्यता की निशानियों को वहाँ से हटाने का यह क़दम महंगा पड़ा है.ग़ौरतलब है कि इराक़ में अमरीकी और ब्रितानी सेनाओं ने इराक़ की राजधानी बग़दाद और बसरा सहित अन्य शहरों में लूटपाट और अराजकता को रोकने के लिए शुरु में कोई क़दम नहीं उठाए थे.नतीजा यह हुआ था कि बग़दाद में राष्ट्रीय संग्रहालय, विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय पुस्तकालय के साथ साथ महत्वपूर्ण स्थानों पर लूटपाट हुई.ऐसे में जिसके हाथ जो लगा, लेकर चलता बना. बहुत से पत्रकारों और सैनिकों ने भी इस मौक़े का फ़ायदा उठाने की कोशिश की.अमरीका में एक टेलीविज़न चैनल 'फ़ॉक्स टीवी' के एक इंजीनियर को कस्टम अधिकारियों ने इराक़ की कई बेशक़ीमती पेंटिंग और अन्य सामान के साथ रंगे हाथों पकड़ा है.बेन जॉन्सन नाम के इस इंजीनियर पर आरोप लगाया गया है कि उसने इराक़ी की बेशक़ीमती पेटिंग को चुराकर अमरीका में लाने की कोशिश की है.रूपर्ट मर्डोक के टेलीविज़न चैनल 'फ़ॉक्स टीवी' के लिए काम करने वाला यह इंजीनियर इराक़ में लड़ाई के दौरान अमरीकी सैनिकों की फ़िल्में बना रहा था.छोटी सी चोरीअमरीका में जब कस्टम अधिकारियों ने बेन जॉन्सन को रोका तो उसने कहा कि उसके पास सिर्फ़ सिगरेट की कुछ डिब्बियाँ हैं जिनकी क़ीमत बीस डॉलर से ज़्यादा नहीं होगी.लेकिन जब उसके सामान की तलाशी ली गई तो उसमें बारह इराक़ी बेशक़ीमती पेटिंग मिलीं जिन्हें बक़ौल जॉन्सन बग़दाद के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के महलों से चुराया गया था.फ़ॉक्स टेलीविज़न चैनल ने इस इंजीनियर को नौकरी से बर्ख़ास्त कर दिया है और उस पर तस्करी करने और पुलिस से ग़लतबयानी करने का आरोप लगाए गए हैं.बेन जॉन्सन के पास जो पेंटिंग थीं अब वे उसी सामान का हिस्सा हैं जिसे अमरीका के कस्टम विभाग ने ज़ब्त करने के बाद प्रदर्शनी के तौर पर रखा है.इस सामान में ख़ूबसूरत चाकू, सोने की पर्त चढ़ी बंदूकें और इराक़ी दीनार के कुछ मियादी बॉन्ड भी शामिल हैं. इराक़ी सभ्यता और इतिहास का बहुमूल्य सामान चुराने के आरोपों में कई अन्य पत्रकारों और सैनिकों से भी पूछताछ की जा रही है.



2 टिप्‍पणियां:

गिरीन्द्र नाथ झा ने कहा…

नेपथ्य से "ख्वाब का दर "तक की यात्रा अच्छी लग रही है. खासकर आज की रिपोर्ट में डूबने का मन कर रहा है...

गिरीन्द्र नाथ झा ने कहा…
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